Monday, October 22, 2018
स्टडी मटेरिल

सोनोग्राफी में भी है करियर

सोनोग्राफी में भी है करियर

 

अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन को ही सोनोग्राफर कहते हैं. पारामेडिकल क्षेत्र के ये पेशेवर कुछ विशेष उपकरणों की मदद से मरीजों के रोगग्रस्त अंगों की तस्वीरें लेते हैं. सोनोग्राफी रोग का पता लगाने के लिए जांच की एक विधि है. इसके लिए जो मशीन इस्तेमाल में लाई जाती है, उससे अल्ट्रासाउंस वेव्स (उच्च फ्रिक्वेंसी वाली ध्वनि तरंगें) उत्पन्न की जाती हैं.
जब इन तरंगों को शरीर के किसी खास हिस्से के ऊपर प्रवाहित किया जाता है, तो सोनोग्राफी मशीन से जुड़ी एक स्क्रीन पर संबंधित अंग, टिश्यू और शरीर के उस हिस्से में हो रहे रक्त संचार की तस्वीरें नजर आने लगती हैं. 
तस्वीरें लेने की इस प्रक्रिया को ही चिकित्सा क्षेत्र की कामकाजी शब्दावली में सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड स्कैन कहा जाता है. इसी तरह इस प्रक्रिया को संपन्न करने वाले पेशेवरों को सोनोग्राफर कहा जाता है. जिन सोनोग्राफरों के पास इमेजिंग और रक्त शिराओं का टेस्ट करने में विशेषज्ञता होती है, उन्हें वस्कुलर टेक्नोलॉजिस्ट कहा जाता है.

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सोनोग्राफी की जरूरत रोगी के शरीर (खासकर रोगप्रभावित अंग) को अंदर से देखने की यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें शरीर के साथ किसी भी तरह की चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं होती. सोनोग्राफी की इस खासियत के कारण इसका इस्तेमाल शरीर के कई अंगों मसलन पेट, स्तन, हृदय, रक्त नलिकाओं, प्रजनन संबंधी अंगों और पौरुष ग्रंथि आदि की जांच के लिए किया जाता है.
हृदय रोग, हृदयाघात और नाड़ी संबंधी रोगों की पहचान और उनके उपचार में सोनोग्राफी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. कैंसर की जांच के लिए होने वाले बायोप्सी टेस्ट में भी सोनोग्राफी मददगार साबित हो रही है. कैंसर की आशंका वाले अंग में बीमारी का पता लगाने के लिए एक बारीक सुई की सहायता से संबंधित अंग से कोशिकाओं (सेल) का थोड़ा-सा नमूना लिया जाता है, जिसकी बाद में प्रयोगशाला में जांच की जाती है. इस प्रक्रिया के दौरान जब सुई को शरीर में प्रवेश कराया जाता है, तब सोनोग्राफी के माध्यम से ही देखा जाता है कि सूई तय स्थान पर पहुंच रही है या नहीं. 
स्पेशलाइजेशन के क्षेत्र (सोनोग्राफी में) ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिक सोनोग्राफी एब्डोमिनल सोनोग्राफी (लीवर, किडनी, गालब्लैडर और पैनक्रियाज) न्यूरोसोनोग्राफी (मस्तिष्क) ब्रेस्ट सोनोग्राफी वस्कुलर सोनोग्राफी (ब्लड वेसल्स) कार्डियक सोनोग्राफी (हर्ट) सोनोग्राफर का काम अस्पताओं, नर्सिग होम और तमाम छोटे-बड़े चिकित्सा संस्थानों में सोनोग्राफर को नियुक्त किया जाता है. वहां वह अपने नियोक्ता संस्थान की जरूरत के अनुसार डायग्नोस्टिक इमेजिंग डिपार्टमेंट, ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू (इंटेंसिव केअर यूनिट) आदि में डॉक्टरों और नर्सो के साथ काम करना होता है. उनके काम का मुख्य हिस्सा होता है, सोनोग्राफी के लिए उपकरणों को व्यवस्थित करना और मरीजों को सही पोजिशन में आने के लिए निर्देशित करना, ताकि बेहतर जांच रिपोर्ट मिल सके. इसके अलावा वह सोनोग्राफी के दौरान स्क्रीन पर यह भी देखते हैं कि रोगी के जिस अंग का चित्र (इमेज) लिया गया है, उससे रोग की पहचान संभव होगी या नहीं. वह लिए गए कई चित्रों में से उन्हीं चित्रों को अंतिम रूप से चुनते हैं, जिनके आधार पर डॉक्टर मरीज में रोग के होने या न होने के निष्कर्ष तक पहुंच सकें.सोनोग्राफर को अपने मूल कार्यों के अलावा कुछ अतिरिक्त कार्य भी करने होते हैं. इनमें रोगियों के रिकॉर्ड को रखना, उपकरणों का रख-रखाव और मरीजों को जांच के लिए समय देना आदि शामिल होता है.
सोनोग्राफर के लिए जरूरी गुण
निरीक्षण करने की बेहतर दृष्टि
अच्छा संवाद कौशल
मरीजों के प्रति नरम रवैया
लंबे समय तक काम करने की शारीरिक क्षमता
अपने क्षेत्र की नई तकनीकों की जानकारी
धैर्य और सहनशीलता
रोगियों का विश्वास जीतने का हुनर
योग्यता- देश के कई शिक्षण संस्थानों में सोनोग्राफी के पाठ्यक्रमों का संचालन हो रहा है. यहां से सर्टिफिकेट से लेकर बैचलर डिग्री हासिल की जा सकती है.