Sunday, September 24, 2017
स्टडी मटेरिल

मर्चेंट नेवी में युवाओं के लिए ढेरों हैं करियर की संभावनाएं

मर्चेंट नेवी में युवाओं के लिए ढेरों हैं करियर की संभावनाएं

नॉटिकल(डेक), इंजीनियरिंग और कैटरिंग विभाग में बना सकते हैं भविष्य

भारतीय युवाओं के बीच मर्चेंट नेवी का क्रेज वर्षों से रहा है. आमतौर पर इसे भारतीय नौसेना का अंग मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. सामान्य अर्थों में मर्चेंट नेवी एक पेशा है, जिसमें व्यावसायिक कार्यों के लिए जलपोतों का इस्तेमाल किया जाता है. चूंकि इसमें लंबे समय तक इसके कर्मियों को समुद्र में बिताना होता है, इसलिए इसमें अच्छी सैलरी भी होती है. मर्चेंट नेवी में करियर इसके तीन विभागों में बनाया जा सकता है. ये तीन विभाग नॉटिकल(डेक), इंजीनियरिंग और कैटरिंग हैं.

नॉटिकल विभाग 

इस विभाग को डेक डिपार्टमेंट भी कहा जाता है. इसमें नियुक्त लोगों का काम बेहतर रेडियो कम्युनिकेशन द्वारा जहाजों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना होता है. इसके अलावा कार्गो (सामान) की लोडिंग-अनलोडिंग और सहयात्रियों की सुविधा का ध्यान भी इन्हें रखना होता है. इस विभाग में टीएनओसी (कैडेट) के रूप में करियर की शुरुआत होती है. इसके बाद बढ़ते अनुभव के साथ थर्ड ऑफिसर, सेकेंड ऑफिसर और चीफ ऑफिसर आदि पद हासिल किये जा सकते हैं.

इंजीनियरिंग विभाग

जहाज की सभी तकनीकी इकाइयों को उनकी क्षमता के साथ संचालित करने का दायित्व इंजीनियरिंग विभाग पर होता है. इस विभाग में कार्य कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग मशीनों (टर्बाइन, इंजन और कंट्रोल सिस्टम आदि) की जांच और मरम्मत की जिम्मेवारी निभानी पड़ती है. इन कार्यों के लिए इंजीनियर और तकनीशियन नियुक्त किये जाते हैं.  यहां जूनियर इंजीनियर, फोर्थ इंजीनियर, थर्ड इंजीनियर, सेकेंड इंजीनियर और चीफ इंजीनियर जैसे कई पद होते हैं.

कैटरिंग विभाग

यह विभाग जहाज पर सवार लोगों के भोजन और आराम की व्यवस्था करता है. इसके अलावा यात्रियों के कपड़ों के लिए लांड्री सेवा भी इसी विभाग के जिम्मे होती है. कैटरिंग एंड हॉस्पिटैलिटी का प्रशिक्षण या अनुभव रखने वालों को इस विभाग में नियुक्त किया जाता है.

तकनीकी विभाग में नियुक्ति की योग्यता

इंजीनियरिंग विभाग के लिए

मर्चेंट नेवी के इंजीनियरिंग विभाग में प्रवेश के लिए इंजीनियरिंग की डिग्री होना आवश्यक है. मरीन इंजीनियरिंग या नेवल आर्किटेक्चर एंड शिप बिल्डिंग में बीटेक किये छात्र इसमें जा सकते हैं. इन कोर्स को करने के लिए अंगरेजी और विज्ञान विषयों के साथ 12वीं होना जरूरी है. जहां फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में 60 फीसदी अंक जरूरी है. 

नॉटिकल विभाग के लिए 

यहां नॉटिकल ऑफिसर बनने के लिए नॉटिकल साइंस में तीन वर्षीय बीएससी डिग्री आवश्यक है. इस पाठ्यक्रम के लिए भी विज्ञान विषयों (मैथ्स जरूरी) के साथ 12वीं पास होना जरूरी है. देश में कई संस्थान नॉटिकल साइंस में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी कराते हैं. इसके अतिरिक्त अब पोर्ट एंड शिपिंग मैनेजमेंट, मैरीटाइम इकोनॉमिक्स एंड ऑपरेशंस और ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स आदि विषयों में पीजी डिप्लोमा या एमबीए जैसे कोर्स हैं.

प्रमुख पाठ्यक्रम

बीटेक (मरीन इंजीनियरिंग)

बीटेक इन नेवल आर्किटेक्चर एंड शिप बिल्डिंग

बीएससी (नॉटिकल साइंस)

बीएससी (मैरीटाइम साइंस)

बीएससी (शिप बिल्डिंग एंड रिपेयर्स)

बीएससी इन शिप रिपेयर एंड शिप बिल्डिंग

डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस

एमटेक (मरीन इंजीनियरिंग)

पीजी डिप्लोमा इन मरीन इंजीनियरिंग

पीजी डिप्लोमा इन मैरीटाइम इकोनॉमिक्स एंड ऑपरेशंस ’ 

पीजी डिप्लोमा इन ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स ’ एमबीए (पोर्ट एंड शिपिंग मैनेजमेंट)

प्रमुख संस्थान

इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई 

कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केरल, 

आइआइटी खड़गपुर, पश्चिम बंगाल

इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन इंजीनियर्स (इंडिया), मुंबई