Tuesday, February 20, 2018
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बातचीत की कला आपको रखेगी आगे, बस इन बातों का रखें ख्‍याल

बातचीत की कला आपको रखेगी आगे, बस इन बातों का रखें ख्‍याल
II विनीत उत्पल II
 
संचार के चार प्रकार होते हैं, जिनमें खुद के साथ बातचीत करने, एक-दूसरे के साथ बातचीत करने, किसी खास समूह के साथ बातचीत करने और फिर जनसंचार शामिल हैं. सभी में बातचीत करने का तरीका अलग होता है, लेकिन बदलते वक्त में सोशल मीडिया की मौजूदगी और संचार भी मायने रखता है. 
 
यह बातचीत करने के तौर-तरीकों के साथ भाषा में भी बदलाव लाने का काम किया है. जाहिर-सी बात है कि पेशेवर दुनिया में जब कोई व्यक्ति नौकरी करने जाता है, तो उसे काफी कुछ सीखना और समझना पड़ता है. मसलन, प्रभावी बातचीत करने की कला क्या होती है और दुनिया के बड़े लीडर किस तरह संवाद के जरिये लोगों में विश्वास पैदा करते हैं. ऐसे में यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाये, तो एक अच्छे वक्ता के साथ-साथ एक अच्छे कर्मचारी या अधिकारी के तौर पर अपनी पहचान बनायी जा सकती है.
 
सुनने की आदत डालें
 
अधिकतर लोगों की चाहत होती है कि लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनें. जीवन में सफल होने का मूलमंत्र है कि आप लोगों पर अपने विचार थोपने के बजाय वे जो कह रहे हैं, उन्हें सुनें. 
 
गलतफहमी दूर करने के लिए बातचीत करें. जिस वक्त जो व्यक्ति आपसे बातचीत कर रहा है, उन्हें दर्शाएं कि वह व्यक्ति आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है. जब आप किसी से बातचीत कर रहे हैं, तो उस वक्त दूसरा काम न करें. साथ ही, उनकी बातों को नोट भी करते जाएं. कभी भी अपनी याददाश्त के भरोसे न रहें. यह आपके ऑफिस के शिष्टाचार की आदतों को दर्शाता है. जितनी अवधि तक आप अपने कार्यालय में है, पूरी तरह औपचारिक रहें और उसी के दायरे में अपने सहकर्मियों से बातचीत करें.
 
औपचारिक भाषा का रखें ख्याल
 
जब आप अपने सहकर्मी या बॉस को ई-मेल कर रहे हैं या फिर कोई संदेश लिखित रूप में दे रहे हैं, तो आप अपनी भाषा सदैव औपचारिक रखें. पूरे ई-मेल में कहीं भी अनौपचारिक भाषा या शब्दों का प्रयोग ना करें और न ही किसी वाक्य के संक्षिप्त रूप को ही लिखें. 
 
आप कभी भी यह अनुमान नहीं लगा सकते कि आपने जिस वाक्य के संक्षिप्त रूप को लिखा है, उसकी जानकरी सामने वाले को हो ही. कुछ संक्षिप्त रूप का अर्थ कई बार अलग-अलग भी होता है. जब भी आप ई-मेल करें, व्हॉट्सएप के जरिये संदेश भेजें, तो अपने शब्दों की वर्तनी जरूर जांच लें. कभी भी शार्ट फॉर्म में कोई भी शब्द न लिखें.
 
बॉडी लैंग्वेज भी अहम
 
जब आप किसी से आमने-सामने बैठ कर बातचीत कर रहे हैं या फिर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कर रहे हैं, तो उस वक्त बोलने के तौर-तरीकों, चेहरे के हाव-भाव भी मायने रखते हैं. आपने किस तरह के कपड़े पहन रखे हैं या पहनते हैं, यह भी आपके व्यवहार और मनोदशा को दर्शाता है और लोग आकलन कर लेते हैं कि आप किस प्रकृति के हैं. 
 
बातचीत करते वक्त अपने बांहों को बंद न कर खुला रखें. सामने वाले से आंखों-से-आंखें डालकर बात करें और सामने वाले को यह महसूस न हो कि आप उसकी अवहेलना कर रहे हैं, या फिर आपको उनकी बात सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
 
कम बोलें, संक्षिप्त बोलें
 
ऑफिस या फिर जहां भी आप काम कर रहे हैं, कम-से कम बोलें. आप जितना कम बोलेंगे, आपकी बात उतनी ही प्रभावी होगी और लोग आपको गंभीरता से लेंगे. साथ ही जब भी बोलें, सोच-समझकर बोलें. बोलने से पहले एक बार रुकें और फिर सोचें कि आप क्या बोलने जा रहे हैं और इसका प्रभाव क्या होगा. 
 
अक्सर लोग ऑफिस की राजनीति में फंस जाते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण अधिक बोलना होता है. इसलिए अपने बातचीत को सीमित रखें. जितना काम हो, उतनी ही बात करें. इस बात का ख्याल कार्यालयीय पत्र लिखते वक्त भी रखें. 
 
आप अपनी पूरी बात जितनी सक्षिप्त में रखेंगे, सामने वाला उतना ही आपसे प्रभावित होगा. यही बात ई-मेल भेजने वक्त भी लागू होती है. जब भी आप किसी को ई-मेल करें, तो अपनी बात संक्षिप्त रखें और इसके लिए प्रैक्टिस बहुत आवश्यक है. हमेशा सकारात्माक सोचें और सकारात्मक पक्षों को ध्यान में रखें.