Tuesday, April 25, 2017
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फ्लोरीकल्चर में संवारें भविष्य

फ्लोरीकल्चर में संवारें भविष्य
डॉ अवधेश िसंह आइआरएस अिधकारी, आइआइटीयन, लेखक
-  क्रोध में किसी फैसले को लेने से हम खुद को किस प्रकार राेक सकते हैं, ताकि हमें बाद में पछताना न पड़े? 
- अंजलि कृपलानी
 
आपने बहुत सही प्रश्न किया है. याद रखिए, हमेशा ही बचाव अच्छा उपचार होता है. बुद्धिमानी इसी में है कि बीमार न पड़ा जाये, न कि इसमें कि बीमार होकर उसका इलाज करवाया जाये.
 
हम जानते हैं आखिर किस तरह हम अपने दिमाग को गर्म होेने से बचा सकते हैं? क्रोध में निर्णय लेने से रोकने के लिए लोग आपको कई तरह की सलाह दे सकते हैं, जिससे आपको बाद में पछताना न पड़े. लेकिन सच तो यही है कि क्रोधित या उत्तेजित होने पर हम अपना विवेक खो बैठते हैं, एेसे में किसी की भी सलाह हमें याद नहीं रहती है.
 
दुनिया का सारा ज्ञान केवल तभी उपयोगी होता है, जब आपका तार्किक दिमाग शांत होता है और वह आपके भावनात्मक हृदय के वश में नहीं होता है.
 
एक बार दिमाग के, दिल के वश में हो जाने पर यह आपकी एक भी सलाह नहीं सुनता है और क्रोध के उस क्षण में खुद को समझाने की आपकी सारी समझ बेकार चली जाती है. इसलिए सही तरीका यही है कि जब भी माहौल गर्म हो, आप उस माहौल से खुद को अलग रखें. इसके लिए आप इन तरीकों को आजमा सकती हैं-
 
-   जिन लोगों को आप पसंद नहीं करतीं हैं, उन्हें नजरअंदाज करें.
-  जब भी इस तरह के लोगों से बात करें, तो खुद को शांत बनाये रखें.
-  माहौल के खराब हो जाने पर वहां से हटने के बहाने तलाशें.
-  अगर आप उस जगह से नहीं हट सकती हैं, तो एकदम शांत बनी रहें, तब भी जब आपको बहुत ज्यादा उकसाया जा रहा हो.
-  जब तक आप शांतचित्त बनी रहेंगी, आपका दिमाग आपके नियंत्रण में रहेगा. इस तरह निश्चित तौर पर आप ऐसी परिस्थिति से निपटने का उपाय सोच लेंगी.
-  लेकिन, जिस पल आप अपना धैर्य खो देंगी, उसी समय आपके दिमाग पर आपका दिल हावी हो जायेगा और तब आपका अपने कृत्यों पर कोई नियंत्रण नहीं रह जायेगा. इस तरह वह घटित हो जायेगा, जिसके लिए बाद में आपको पछताना पड़ सकता है.