Saturday, December 15, 2018
ओपिनियन

इंटरनेट की मदद से घर बैठे कर सकते हैं तैयारी

इंटरनेट की मदद से घर बैठे कर सकते हैं तैयारी

 मैं बारहवीं में हूं और भविष्य में हिंदी माध्यम से आईएएस की तैयारी करना चाहता हूं. क्या मैं घर से इसकी तैयारी कर सकता हूं? -धर्मेश कुमार वर्मा

आपने सही निर्णय लिया है. इस परीक्षा की तैयारी घर पर रहते हुए की जा सकती है. इसके लिए आप इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं.

मैं जानना चाहती हूं. आईएएस के लिए हमें कौन-सी किताबों का चयन करना चाहिए. मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल है. -दीक्षा तिवारी

पुस्तकों की सूची के लिए कृपया मुझे ई-मेल कीजिये.

आईएएस की परीक्षा क्या है? मैं अभी दसवीं का छात्र हूं और अभी से ही इसकी तैयारी कैसे करूं? 

-मनोज सिंह

आईएएस का मतलब है- इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस. यह देश की सर्वोच्च सरकारी सेवा मानी जाती है, जिसमें हर कोई शामिल होना चाहता है. लेकिन इसकी परीक्षा बेहद कठिन है. अगर आप इसमें जाना चाहते हैं, तो अभी से ही देश-दुनिया की खबरों पर अपनी नजर बनाये रखें.

  मैं अभी बारहवीं एग्रीकल्चर से कर रहा हूं और इसी विषय से ग्रेजुएशन भी करना चाहता हूं. क्या मुझे इसका लाभ सिविल सेवा परीक्षा में मिल सकता है? -कैसर जीशान

हां, आप एग्रीकल्चर को अपना वैकल्पिक विषय बनाकर इसका लाभ ले सकते हैं और यह अंकदायी विषय भी रहा है.

 मैं इंग्लिश ऑनर्स कर रहा हूं. क्या मैं बीपीएससी की परीक्षा हिंदी में दे सकता हूं? बीपीएससी के लिए कहां कोचिंग ज्वॉइन करनी चाहिए? एनसीईआरटी बुक का प्रत्येक चेप्टर करना जरूरी है. -अटल कुमार यादव

हां, आप हिंदी माध्यम से परीक्षा दे सकते हैं. कोचिंग के लिए पटना, रांची या दिल्ली बेहतर है. एनसीईआरटी के सभी टॉपिक्स को पढ़ें और उनके प्रश्नों को भी हल करें.

मुझे वैकल्पिक विषय चुनने में कठिनाई हो रही है. हिस्ट्री, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पॉलिटिकल साइंस के बीच उलझन में हूं. कृपया सुझाव दें. तथ्यों को याद रखना भी एक बहुत बड़ी चुनौती है. -रोहित सिंह

आप इनमें से इतिहास रखें, तो बेहतर होगा क्योंकि शेष दोनों विषयों के लिए आपका माध्यम अंग्रेजी होने पर ही लाभ है. किसी भी चीज को याद रखने के लिए उसका रिवीजन जरूरी है.

 मैं बीटेक (सिविल) कर रहा हूं. मैं जानना चाहता हूं कि आईएएस परीक्षा के लिए मुझे किस वैकल्पिक विषय का चयन करना चाहिए? -रमेश महतो

इसके लिए आप अपनी रुचि के दो-तीन विषयों को सामने रखकर उनके सिलेबस और सवाल को ठीक से देखें और तब यह निर्णय लें कि आपके लिए क्या अच्छा रहेगा.

  मैं बीए (इकोनॉमिक्स) का छात्र हूं. क्या एमबीए करने के बाद मेरे लिए इंडियन इकोनॉमिक सर्विसेज एक विकल्प हो सकता है? कृपया मेरा मार्गदर्शन करें. -सौरभ मिश्रा

हां, यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है और आप इस सेवा के माध्यम से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर तक बन सकते हैं.

सिविल सेवा मार्गदर्शन

अजय अनुराग, निदेशक, विजडम आइएएस एकेडमी, दिल्ली

बातचीत की कला दिलायेगी सफलता

बातचीत करना एक कला है और निजी से लेकर पेशेवर जिंदगी में यह काफी मायने रखता है. औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत का भी एक दायरा होता है और अक्सर औपचारिक बातचीत के क्रम में अनौपचारिक बातचीत शुरू हो जाती है, जो गलत है. सफलता पाने के लिए दोनों को अलग-अलग रखना आवश्यक है.

जी वन में सफलता पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता या फिर ऐसी कोई दवा नहीं होती, जिसे आप रात में लिये और सुबह उठते ही सफल हो गये. यह सतत प्रयास का परिणाम होता है और इसका निर्धारण व्यक्ति के चहुंमुखी विकास से ही संभव है. सफलता की सीढ़ी चढ़ने के क्रम में बातचीत का तरीका अपनी अहमियत रखता है.

इसका कारण यह है कि आपका बायोडेटा या सीवी में लिखी योग्यता या प्रवेश परीक्षा में सफलता आपको अपनी मंजिल के दरवाजे पर पहुंचा देगी, लेकिन उसके अंदर प्रवेश और मंजिल की नियति आपके बातचीत की कला और आत्मविश्वास पर निर्भर करेगी. ऐसे में यदि शुरुआती दौर से अपने बोलने की दशा और दिशा पर ध्यान दिया जाय, तो सफलता आसानी से प्राप्त की जा सकती है.

शब्दों के चयन का रखें ध्यान

बातचीत के क्रम में अपने शब्दों के इस्तेमाल पर अवश्य ध्यान दें. कई बार स्थान के हिसाब से भी शब्द अलग हो जाते हैं या फिर शब्दों के मायने बदल जाते हैं. वाक्य के हिसाब से भी शब्द के अर्थ बदलते हैं. अक्सर स्त्री, औरत, महिला, लेडी जैसे शब्दों के प्रयोग के दौरान लोगों को परेशानी आती है, तो हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किन शब्दों का प्रयोग कहां उचित होगा.

कौन-से संस्कृतनिष्ठ हिंदी शब्दों का प्रयोग हम कर रहे हैं, या फिर अरबी-फारसी का प्रयोग कर रहे हैं, इसकी भी अपनी अहमियत है. तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज शब्दों का प्रयोग करते समय भी उन शब्दों को समझें. अंग्रेजी बोलते समय भी अमेरिकन और ब्रिटिश शब्दों पर भी ध्यान रखें.

उच्चारण भी महत्वपूर्ण

बातचीत करते समय शब्दों का उच्चारण काफी महत्वपूर्ण होता है. हिंदी में बातचीत करते समय बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकतर लोग ‘स’, ‘श’ और ‘ष’ के उच्चारण में फर्क नहीं कर पाते. इसके अलावा, ‘र’ और ‘ड़’ के उच्चारण में भी गलती हो जाती है. यह सच है कि जब वे इन शब्दों को लिखेंगे तो सही लिखेंगे, लेकिन उच्चारण में दोष उत्पन्न होता है. चूंकि, हिंदी के कई शब्द उर्दू से आये हैं, तो हमें इस बात का ध्यान रखना चहिये कि किस शब्द में ‘नुक्ता’ का प्रयोग होता है और किस शब्द में नहीं. हरियाणा के लोग लिखते समय भी ‘ड’ और ‘ड़’ में फर्क ही नहीं कर पाते हैं. कई लोग स्कूल को ‘सकूल’ भी बोलते हैं. यदि ऐसी छोटी-मोटी गलतियां आपके उच्चारण में होती है, तो इसका ख्याल रखें और इसे सुधारने की कोशिश करें. अंग्रेजी में भी बात करते वक्त शब्दों के उच्चारण का ध्यान रखें, कई बार उटपटांग उच्चारण के कारण हम हंसी के पात्र बनते हैं. इससे निजात पाने के लिए हिंदी और अंग्रेजी समाचार सुनें और इन भाषाओं में प्रसारित होनेवाली फिल्मों को भी देखें. इससे अपने उच्चारण को सुधार करने में आसानी होगी.

जेंडर का रखें ध्यान

हम जब किसी से बातचीत करें, तो जेंडर का ध्यान अवश्य रखें. हिंदी प्रदेशों से आनेवाले छात्र इस तरह की गलतियां काफी करते हैं. वाक्य लिखते समय तो करते ही हैं, बातचीत के क्रम में भी करते हैं. ऐसे में उन शब्दों और व्याकरण का पढ़ना आवश्यक है, जिसके तहत लिंग (जेंडर) का निर्धारण होता है. उन अपवाद शब्दों को भी जानना आवश्यक है, जो देखने में पुलिंग या स्त्रीलिंग लगते हैं, लेकिन वह होता इसके विपरीत है. अंग्रेजी में भी ‘ही’, ‘शी’ और ‘इट’ शब्दों का प्रयोग करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए.

वाक्य विन्यास का रखें ख्याल

यह बात सच है कि कोस-कोस पर वाणी बदल जाती है और हिंदी में बातचीत के क्रम में हमलोग कई स्थानीय शब्दों का प्रयोग करते हैं, लेकिन जब हम कोई इंटरव्यू फेस करते हैं या ग्रुप डिस्कशन करते हैं, तो उन शब्दों का प्रयोग ना करें, तो बेहतर छवि सामने उभर कर आती है. इसके अलावा, जब आप बातचीत के कौशल की तैयारी करें, तो उसका ऑडियो रिकॉर्ड करें और उसे ट्रांसस्क्रिप्ट करें, तो पायेंगे कि आप कई ऐसे शब्द का प्रयोग अपनी बातचीत के क्रम में करते हैं, जिसकी आपको जरूरत नहीं थी.

या फिर उसकी भाषा कोई और है. मसलन, आप पूछना चाहते हैं कि ‘क्या आप हमारे साथ जा रहे हैं?’ तो आप कहते हैं, ‘मेरे साथ जा रहे हो, ना?’, इन बातों का ख्याल रखें. पहला वाक्य आपके औपचारिक बातचीत को बताता है और दूसरा वाक्य आपके अनौपचारिक व्यक्तित्व को दर्शाने के लिए काफी है.