Tuesday, August 21, 2018
ओपिनियन

दुनिया तो भगवान से भी दुखी है

दुनिया तो भगवान  से भी दुखी है

 पर्सनािलटी प्लस

आशीष आदर्श,  कैरियर काउंसेलर 

 
कु छ समय पहले मैंने एक कोटेशन पढ़ा था, इंसान को अपनी नजर में सही होना चाहिए, वरना दुनिया तो भगवान से भी दुखी है. हमारे जीवन में आसपास के लोगों का अपना-अपना नजरिया होता है, जिससे वे दूसरों को देखते हैं. किसी के लिए पैसा महत्वपूर्ण है, तो किसी के िलए भावनाएं. अतः हमें केवल स्वयं पर विश्वास करना चाहिए. यदि हम ठीक हैं, तो फिर चिंता करने की कोई बात नहीं. इस विषय को गहराई से समझने के लिए एक कहानी की ओर चलते हैं.
 
 किसी गांव में एक जौहरी पत्नी और एक बेटे के साथ रहता था. बेटा पढ़ने लिखने में अच्छा था, परंतु लोगों की छोटी-छोटी बातों से तनाव में आ जाता. जौहरी उसकी इस आदत से परेशान था. एक दिन उसने बेटे को बुलाया और उसे एक पत्थर देकर बोला, बेटा, तुम्हें यह पत्थर लेकर अलग-अलग लोगों के पास जाना है और इसकी कीमत लगवानी है, परंतु ध्यान रहे, तुमको पत्थर बेचना नहीं है. बेटा पत्थर लेकर निकला. सबसे पहले सामने जा रहे सब्जीवाले से पूछा, भैया, तुम इस पत्थर को खरीदोगे, तो इसका क्या मूल्य दोगे? सब्जीवाला बोला, इसका वजन तो मेरे आधे किलो के बटखरे के आसपास लगता है.
 
मैं इसका 100 रुपये दे दूंगा. अब बेटा पत्थर लेकर आगे बढ़ा. उसे एक मार्बल टाइल्स वाला दिखा. बेटे ने उसे पत्थर दिखाया और उसका मूल्य पूछा. मार्बल वाला बोला, इस पत्थर को मैं किसी मंदिर में लगवा सकता हूं. मैं इसके 2000 रुपये दे दूंगा. बेटा वहां से निकला और आगे बढ़ा, उसे एक सोनार दिखायी दिया. सोनार ने पत्थर को देखकर कहा, मैं इसके 10,000 रुपये दे सकता हूं. बेटा आश्चर्य से सोचने लगा कि लोग एक ही चीज का अलग-अलग दाम क्यों लगा रहे हैं.
 
यह सोचते हुए वह आगे बढ़ा ही था, तभी उसे एक रत्नवाले की दूकान दिखायी दी. उसने पत्थर को दुकानदार को दिखाया. पत्थर को देखते ही दुकानदार बोला, यह तो कोई बेशकीमती पत्थर लगता है, इसकी कीमत मैं तो क्या, दुनिया में कोई नहीं दे सकता. यह सुनकर बेटा सीधे अपने घर पहुंचा और सारी बात पिता को सुनायी. पिता के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गयी.
 
वे बोले, तुमने देखा बेटा, एक पत्थर की कीमत भी अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग लगायी, ऐसा इसलिए है कि हर इंसान अपनी सोच के अनुसार ही सामनेवाले को आंकता है. इसी प्रकार, तुम्हारा टैलेंट अपनी जगह कायम है. इसका मूल्य हर कोई नहीं समझ सकता. इसलिए तुमको लोगों की बातों से स्वयं को प्रभावित नहीं करना चाहिए. यह सुनकर बेटे की आंखों में चमक आ गयी, मानो उसे जीवन को देखने का एक नया नजरिया मिल गया हो.