Sunday, November 19, 2017
ओपिनियन

समाज में मौजूद सभी चीजों पर प्रश्न उठाना क्या सही है?

समाज में मौजूद सभी चीजों पर प्रश्न उठाना क्या सही है?
इस दुनिया में महज एक व्यक्ति से समाज, संगठन या देश नहीं बनता है. ये सभी संगठन लोगों के समूह के नाम हैं, जो कानून के जरिये अस्तित्व में लाये गये हैं. मान लीजिए कि आप समाज पर प्रश्न उठाना चाहते हैं, तो ऐसे में आप किस पर सवाल उठायेंगे?
 
अपने पिता पर, बच्चों पर, रिश्तेदारों पर, पड़ोसियों पर, बॉस पर, मातहत पर . आखिर किस पर सवाल उठायेंगे. समाज के सदस्यों की यह सूची अंतहीन है. यहां तक कि आप भी इसी समाज का हिस्सा हैं.
 
अगर आप सौ लोगों से सवाल पूछते हैं, तो आपको सभी के अलग-अलग विचार प्राप्त हाेते हैं और उनमें से एक भी विचार समाज की विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करता है. 
 
आइए, इसी संदर्भ में मुल्ला नसरुद्दीन का एक किस्सा सुनाता हूं. एक बार राजा के तीन विद्वानों ने मुल्ला नसरुद्दीन को विधर्मी मान कर उन पर मुकदमा चलाने के लिए उन्हें राजा के दरबार में लेकर आये. अपने बचाव में मुल्ला ने उन विद्वानों से एक सवाल पूछा- हे बुद्धिमान मनुष्य, रोटी क्या है? इस पर पहले विद्वान ने कहा कि रोटी जीविका है, एक भोज्यपदार्थ. दूसरे विद्वान ने कहा कि रोटी आटा और पानी का मिश्रण है, जिसे आग की गरमी से पकाया जाता है.
 
तीसरे विद्वान ने कहा कि रोटी भगवान द्वारा दिया गया उपहार है. तीनों विद्वानों की बातें सुनने के बाद नसरुद्दीन ने राजा से कहा - महामहिम, आप इन पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? यह अचरज की बात नहीं है कि जिस चीज को ये रोज खाते हैं, उसकी प्रकृति को लेकर जब ये एकमत नहीं हो सकते, तो इस बात पर कैसे एकमत हो सकते हैं कि मैं एक विधर्मी हूं?
 
इसलिए समाज से कुछ भी पूछने में अपना समय बरबाद मत कीजिए, क्योंकि समाज की आेर से कोई भी व्यक्ति आपके प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकता है. समाज के सदस्यों को लगता है कि वे जो सोचते और करते हैं वह सही है. आपको भी सोचना चाहिए और जो सही लगे उसे करना चाहिए.

डॉ अवधेश सिंह आइआरएस अिधकारी, आइआइटीयन, लेखक

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