Sunday, September 24, 2017
ओपिनियन

एक-एक बूंद से भरता है घड़ा

एक-एक बूंद से भरता है घड़ा

कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता. किसी भी विचार या संग्राम या आंदोलन  में एक-एक व्यक्ति का योगदान होता है. इसलिए यह सोचना बेमानी होगा कि  अकेले मेरे करने से क्या होगा. किसी विचारक ने कहा था– जिम्मेवारी हमेशा  अपना रास्ता खोज लेती है और गैर जिम्मेवारी अपना बहाना. अतः हमें किसी भी  कार्य का हिस्सा बनना चाहिए, ताकि हमें अहसास हो कि हम केवल एक शरीर ही  नहीं हैं, बल्कि इसके अंदर हमारा जीवित व सचेत जमीर भी है.

जेहन में आती है कि मेरी अकेले की भला क्या बिसात है और जब बाकी लोग नहीं कर रहे, तो मेरे अकेले के कुछ करने से भला क्या फर्क पड़ेगा. लेकिन, सच तो यह है कि किसी काम को नहीं करने की यह बहानेबाजी है, क्योंकि देश में जितनी भी बड़ी क्रांतियां हुईं, उनकी मशाल लेकर सबसे पहले कोई एक व्यक्ति ही आगे चला और समय के साथ लोग उनके साथ जुड़ते गये. आइये, इस आशय को कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं.

 एक परिवार अपनी छुट्टियां बिताने गोवा गया. परिवार में पति-पत्नी और एक 5-6 साल की बच्ची थी. सभी लोग गोवा के बीच पर पहुंचे.  तभी थोड़ी देर में समुद्र में तेजी से एक बड़ी लहर आयी और चली गयी, लेकिन उस लहर ने ढेर सारी मछलियों को बीच के रेत पर फेंक दिया. लहर जब वापस चली जाती तो पड़ी हुई मछलियां तड़पती रहती. ऐसा थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगातार हो रहा था. यह सब कुछ वह छोटी बच्ची देख रही थी. अचानक वह अपनी जगह से उठी और उसने तड़पती हुई मछली को उठा कर आगे समुद्र की पानी में फेंकना शुरू कर दिया. यह देख कर उसकी मां ने कहा, बेटी, इतनी अधिक मछलियां पानी से बाहर आकर तड़प रही हैं, उनमें तुम कुछ एक मछलियों को ही पानी में डाल पाओगी, इससे क्या फर्क पड़ेगा. ज्यादातर मछलियां तो फिर भी मर ही जायेंगी. यह बात सुन कर बच्ची और तेजी से दौड़-दौड़ के तड़पती हुई मछलियों को उठा-उठा कर समुद्र के पानी में डालने लगी. मां ने फिर कहा- बेटी, थोड़ी देर में फिर पानी की लहर आयेगी और फिर ढेर सारी मछलियों को रेत पर पटक कर चली जायेगी, इसलिए यह सब करने से क्या फायदा, तुम कुछ मछलियों को ही पानी में फेंक पाओगी, इससे इनको क्या फर्क पड़ेगा? यह सुन बच्ची रोने लगी और बहुत जल्दी-जल्दी उसने तड़पती मछलियों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया. अब मां ने कहा- बेटा, जो तुम कर रही हो, उससे ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ेगा. बच्ची एक पल रुकी और उसने अपनी मां की ओर देखते हुए कहा- मां, लेकिन इससे उन मछलियों को तो पूरा फर्क पड़ेगा, जिनको रेत से उठा कर पानी में फेंक दिया गया. बेटी का जवाब सुनकर मां सन्न रह गयी और उसने दौड़ कर अपनी बच्ची को गले लगा लिया.

बहुत पुरानी कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता. किसी भी विचार या संग्राम या आंदोलन में एक-एक व्यक्ति का योगदान होता है. इसलिए यह सोचना बेमानी होगा कि अकेले मेरे करने से क्या होगा. किसी विचारक ने कहा था– जिम्मेवारी हमेशा अपना रास्ता खोज लेती है और गैर जिम्मेवारी अपना बहाना. अतः हमें किसी भी कार्य का हिस्सा बनना चाहिए, ताकि हमें अहसास हो कि हम केवल एक शरीर ही नहीं हैं, बल्कि इसके अंदर हमारा जीवित व सचेत जमीर भी है.

आशीष आदर्श

कैरियर काउंसेलर 
aaashish500@gmail.com