Monday, October 22, 2018
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सिविल सेवा परीक्षा 2018 : बड़ी चुनौती बड़ी सफलता

सिविल सेवा परीक्षा  2018 : बड़ी चुनौती बड़ी सफलता

 महत्वपूर्ण सूचनाएं

कुल रिक्तियां : 782

आवेदन आरंभ : 07 फरवरी, 2018

आवेदन की अंतिम तिथि : 6 मार्च, 2018

परीक्षा की तिथि : 03 जून, 2018

आयु-सीमा : सामान्य श्रेणी : 21-32 वर्ष, ओबीसी : 21-33, एससी/ एसटी : 21-40

कैसे करें आवेदन : यूपीएससी की वेबसाइट www.upsconline.nic.in पर जाकर आवेदन करें.

अजय अनुराग, निदेशक, विजडम आइएएस एकेडमी, दिल्ली

भा रत में सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों और लगभग एक साल में संपन्न होनेवाली सर्वाधिक प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है. यह परीक्षा ऐसा अवसर देती है, जिसके जरिये आप सीधे भारतीय शासन-प्रशासन का हिस्सा बन जाते हैं और देश के नीति-निर्माण में अपना अहम योगदान देते हैं. फिर, आज जब वैश्विक आर्थिक दबाव के माहौल में बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की ‘सैलरी पैकेज’ में कटौती कर रही हैं, तब सातवें वेतन आयोग द्वारा सरकारी वेतन में बढ़ोतरी एक बड़ी उम्मीद जगाती है. यदि आप अपने जीवन में पद, प्रतिष्ठा और सम्मान पाने का सपना रखते हैं, तो आपके सपनों के साकार होने का समय आ चुका है. लेकिन सवाल है कि क्या आप इसके लिए तैयार हैं?

 अपने देश में सिविल सेवा भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित व सम्मानीय सेवा के रूप में जानी जाती है. यही वजह है कि रोजगार के तमाम विकल्पों के बावजूद इस परीक्षा में शामिल होनेवाले युवाओं की संख्या साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है. हाल के वर्षों में इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट पृष्ठभूमि के युवाओं का भी सिविल सेवा की तरफ रुझान बढ़ा है. सिविल सेवा के प्रति बढ़ते रुझान की मुख्य वजह सैलरी और सुविधाएं ही नहीं हैं, बल्कि इस सेवा के जरिये नेतृत्व करने,

सामाजिक प्रतिष्ठा और देश की सामान्य जनता से सीधे जुड़ने जैसे अवसर भी मिलते हैं. सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के लिए अब करीब 7 से 9 लाख अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, जबकि अंतिम सफलता का औसत प्रतिशत लगभग 0.001 है. जाहिर सी बात है कि यह परीक्षा उस भवसागर के समान है, जिसे पार करने के लिए उम्मीदवारों को कड़ी मेहनत, सही रणनीति, लगन तथा समर्पण की जरूरत होती है.

 सिविल सेवा परीक्षा को लेकर युवाओं के मन में कई तरह के सवाल होते हैं. इस परीक्षा की गहराई, विषयों की विविधता और इसमें सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों की बड़ी तादाद को देखते हुए यह आवश्यक है कि इसकी आपको पूरी जानकारी हो. अतः इस परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले इससे जुड़े सभी पहलुओं को जान लेना बेहद जरूरी है.

परीक्षा-प्रणाली

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में होती है- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार. इसमें प्रारंभिक परीक्षा एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिसकी प्रकृति वस्तुनिष्ठ एवं वैकल्पिक प्रकार की होती है. इसका उद्देश्य अभ्यर्थी के अध्ययन की व्यापकता और तत्काल निर्णय लेने की क्षमता को जांचना है. मुख्य परीक्षा एक लिखित परीक्षा है, जिसके तहत अध्ययन की गहराई तथा विश्लेषण क्षमता का परीक्षण होता है. परीक्षा के अंतिम चरण साक्षात्कार के जरिये व्यक्तित्व के गुणों और उसकी समसामयिक विषयों के प्रति समझ व जागरूकता की जांच की जाती है.

शैक्षणिक योग्यता व परीक्षा का माध्यम

अभ्यर्थी के पास केंद्रीय अथवा राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय की डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता होनी चाहिए. यहां कोई न्यूनतम अंक प्रतिशत निर्धारित नहीं है. परीक्षा का माध्यम हिंदी अथवा अंग्रेजी हो सकता है.

प्रारंभिक परीक्षा

यह त्रि-स्तरीय सिविल सेवा परीक्षा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है. इसमें प्रति वर्ष लगभग 4-5 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं, लेकिन इनमें से केवल 13-14 हजार ही मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर पाते हैं. प्रारंभिक परीक्षा में 200-200 अंकों के दो प्रश्नपत्र होते हैं, जिनकी अवधि दो-दो घंटे की होती है.

 प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन का होता है, जिसमें इतिहास, भूगोल, राज-व्यवस्था, सामान्य विज्ञान, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सामयिक घटनाओं आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है. < पेज दो पर जारी...

प्रत्येक प्रश्न के लिए दो अंक निर्धारित हैं और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काटे जाते हैं. प्रारंभिक परीक्षा का दूसरा पेपर सीसैट है. इसमें बोधगम्यता, संचार कौशल सहित अंतर- वैयक्तिक कौशल, तार्किक कौशल और विश्लेषणात्मक क्षमता, निर्णयन और समस्या-समाधान, सामान्य मानसिक योग्यता आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं. प्रारंभिक परीक्षा के अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते.

मुख्य परीक्षा

दूसरे और सर्वाधिक महत्वपूर्ण इस चरण में अभ्यर्थियों के ज्ञान की वास्तविक परीक्षा होती है. इसमें कुल 1750 अंकों के 9 प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन के चार पेपर, किसी एक वैकल्पिक विषय के दो पेपर तथा निबंध, सामान्य अंग्रेजी व हिंदी के 1-1 पेपर) होते हैं. इसमें से सामान्य अंग्रेजी और हिंदी पेपर के अंक कुल पूर्णाक में नहीं जुड़ते हैं.

साक्षात्कार

परीक्षा के इस अंतिम चरण में अभ्यर्थियों के बायो डाटा, उनके वैकल्पिक विषय, अभिरुचियों, समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से प्रश्न पूछे जाते हैं. साक्षात्कार 225 अंकों का होता है. साक्षात्कार में आपके ज्ञान से ज्यादा, उसकी प्रस्तुति, आत्मविश्वास और महत्वपूर्ण मामलों पर आपके विचारों की परख होती है.

प्रारंभिक परीक्षा : कैसे करें तैयारी?

प्रथम पड़ाव के रूप में प्रारंभिक परीक्षा है, जिसका उद्देश्य अभ्यर्थियों की छंटनी करना है, जो अध्ययन और तैयारी की गंभीरता के उन सोपानों को अभी नहीं छू पाये हैं, जिसकी आयोग अपेक्षा करता है. इसमें सफल होने के लिए मात्र कठिन परिश्रम ही आवश्यक नहीं है, बल्कि इसके लिए एक ठोस रणनीति का होना बेहद जरूरी है. प्रारभिक परीक्षा का मुख्य उद्देश्य तथ्यात्मक ज्ञान के साथ तत्काल निर्णय लेने की क्षमता को जांचना है.

इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-

< प्रारंभिक परीक्षा का स्वरूप यूं तो वस्तुनिष्ठ प्रकार का होता है, लेकिन तथ्य के साथ-साथ अवधारणात्मक समझ भी जरूरी है. अतः इसकी तैयारी बिना कोई शॅार्टकट अपनाये पूरे सिलेबस की करनी चाहिए. 

< दोनों पेपर में पूछे गये प्रश्नों का विश्लेषण भी करें, ताकि यह ज्ञात हो सके कि प्रश्न कहां से और किस प्रकार से पूछे जाते हैं.

< पुस्तकों का अधिकाधिक संग्रह करने से सदैव बचें. हमेशा मानक पुस्तकें ही पढ़ें और बार-बार पढ़ें, यानी कम पुस्तकें ज्यादा बार पढ़ें, न कि ज्यादा पुस्तकें एक बार. सामान्य अध्ययन के लिए आप एनसीईआरटी की पुस्तकों को वरीयता दें. 

< सामान्य अध्ययन के प्रत्येक खंड को पढ़ें, ताकि जिन खंडों में आप कमजोर हैं, वहां से अधिक नहीं, तो 30-35 प्रतिशत प्रश्न हल कर लें.

< ऐसे प्रश्न को बिल्कुल न छुएं, जिसका आपको बिल्कुल सही उत्तर न आता हो. इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग लागू है.

< जो भी पढ़ें, ठोस पढ़ें, अर्थात् तथ्यों की बारीकी से अवश्य परिचित रहें, ताकि सही उत्तर चुनते समय मिलते-जुलते विकल्पों से ‘कन्फ्यूजन’ न हो. जिन बिंदुओं पर ‘कन्फ्यूजन’ हो उनका नोट्स अवश्य बनायें. कुछ छोटे-छोटे संकेतक तय कर लें, जो आपको तथ्यों को याद दिलाने में सहायक हों.

< परीक्षा से पूर्व अभ्यास करने पर अधिक बल दें. विगत वर्षों के प्रश्नों को हल करें और साथ ही राज्य सेवाओं के प्रश्नों को भी हल करेंगे, तो लाभ होगा.

सीसैट : न करें नजरअंदाज

प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट क्वाॅलिफाइंग प्रकृति का प्रश्नपत्र है. इसमें न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना ही पर्याप्त है. लेकिन, इसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है, क्योंकि कई बार अभ्यर्थी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक भी नहीं ला पाते. सीसैट सामान्य अभिरुचि या अभिवृत्ति की जांच है, जिससे समझ शक्ति, निर्णयन क्षमता, तार्किकता, भाषा के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण की योग्यता तथा बुनियादी योग्यताओं को परखा जाता है, जो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए आवश्यक गुण माने जाते हैं.

योग्यता व पृष्ठभूमि

इस परीक्षा में सफल होने के लिए उच्च आर्थिक-शैक्षणिक पृृष्ठभूमि का होना कोई मापदंड नहीं है. सबसे जरूरी है- उचित रणनीति और कठोर परिश्रम. इस परीक्षा के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक है और यहां कोई न्यूनतम अंक प्रतिशत निर्धारित नहीं है. इसी तरह सफलता के लिए आर्थिक रूप से भी बहुत मजबूत होना जरूरी नहीं है. कई प्रतियोगी अत्यंत साधारण अथवा गरीब परिवार से जुड़े होने के बावजूद सिविल सेवा में सफल हुए हैं.

क्या है नेगेटिव मार्किंग?

परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए निर्धारित अंक काटे जाने का प्रावधान है. प्रत्येक गलत उत्तर पर एक तिहाई अंक (0.33 अंक) दंडस्वरूप काट लिया जाता है.

  यदि किसी प्रश्न को अनुत्तरित छोड़ दिया जाये, तो उसके लिए अंक नहीं काटे जायेंगे. बेहतर होगा जिन प्रश्नों के बारे में थोड़ी-सी भी दुविधा अथवा संदेह हो, उसे परीक्षार्थी हल न करें.

सफलता का मूलमंत्र : अभ्यास

प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी करते हुए अभ्यर्थी प्रायः अध्ययन पर ही अधिक बल देते हैं और परीक्षा के आखिरी वक्त तक पढ़ते रहते हैं. जबकि इस परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यास करना बेहद जरूरी है. इसका लाभ यह होता है कि आप अपने अध्ययन के प्रति आश्वस्त होते हैं और किसी तरह का कोई ‘कन्फ्यूजन’ नहीं रहता है. प्रैक्टिस के लिए विगत वर्षों के प्रश्नों के साथ-साथ किसी स्तरीय प्रैक्टिस बुक कि सहायता ली जा सकती है. बेहतर होगा कि प्रैक्टिस करते हुए आप जिन विषयों अथवा खंडों में कठिनाई महसूस करें, उसका रिवीजन फिर से कर लें.