Saturday, December 15, 2018
इंजीनियरिंग

संभावनाओं की गहराई समुद्र विज्ञान की पढ़ाई

संभावनाओं की गहराई समुद्र विज्ञान की पढ़ाई

 नौवहन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सदियों से बड़ा माध्यम रहा है. समुद्री रास्तों से होनेवाले व्यापार को किसी देश की अर्थव्यवस्था के विकास रीढ़ के तौर पर देखा जाता है. समुद्री सीमाओं से जुड़े देशों को इससे आर्थिक के साथ-साथ सामरिक हितों का बड़ा लाभ मिलता है. जिस तेजी से हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है,

उसमें शिपिंग और मैरीटाइम इंडस्ट्री का बड़ा योगदान है. दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा में ऐसे प्रोफेशनल की मांग बढ़ रही है, जो इस इंडस्ट्री से जुड़कर समुद्र में संभावनाओं के गोते लगायें. एक प्रोफेशनल के तौर पर प्रशिक्षित युवाओं का मैरीटाइम इंडस्ट्री में कैप्टन, इंजीनियर, शिप बिल्डर, पोर्ट मैनेजर, लॉजिस्टिक एक्सपर्ट जैसे तमाम मौके इंतजार कर रहे हैं.

आईएमयू में प्रवेश लेकर बनाएं मुकाम
 
भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के तौर पर मैरीटाइम स्टडीज, ट्रेनिंग, रिसर्च के लिए बेहतरीन मौके उपलब्ध कराता है. देशभर के छह कैंपसों में इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी मैरीटाइम से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में यूजी, पीजी और रिसर्च किया जा सकता है. आईएमयू का मुख्य उद्देश्य ओशिनोग्राफी, मैरीटाइम हिस्ट्री, मैरीटाइम लॉ, मैरीटाइम सिक्योरिटी, सर्च व रेस्क्यू, ट्रांसपोर्टेशन और एन्वायर्नमेंटल स्टडीज आदि विषयों के व्यापक अध्ययन का प्रसार करना है.
विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश का मौका
 
आईएमयू द्वारा स्कूल ऑफ मैरीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ नॉटिकल स्टडीज, स्कूल ऑफ नवल आर्किटेक्चर एंड ओशन इंजीनियरिंग, स्कूल मैरीटाइम मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ एलायड स्टडीज, स्कूल ऑफ नवल स्टडीज और स्कूल ऑफ रिसर्च स्टडीज संचालित किया जाता है.
 
अंडरग्रेजुएट कोर्स 
 
बीटेक (मरीन इंजीनियरिंग), बीटेक (नवल आर्किटेक्चर एंड ओशन इंजीनियरिंग), बीएससी (नॉटिकल साइंस), बीएससी (शिप बिल्डिंग एंड रिपेयर) और डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस (डीएनएस) (एक वर्षीय प्रोग्राम).
पोस्टग्रेजुएट कोर्स 
 
एमटेक (नवल आर्किटेक्चर एंड ओशन इंजीनियरिंग), एमटेक (ड्रेजिंग एंड हार्बर इंजीनियरिंग), एमबीए (पोर्ट एंड शिपिंग मैनेजमेंट), एमबीए (इंटरनेशनल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट), एलएलएम (मैरीटाइम), पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैरीन इंजीनियरिंग (पीजीडीएमई).
 
सीईटी से मिलेगा दाखिला
इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के विभिन्न यूजी और पीजी प्रोग्राम में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित की जानेवाली ऑनलाइन संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) को पास करना होगा. परीक्षा बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्नों पर आधारित होगी तथा परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग व्यवस्था लागू नहीं होगी. प्रवेश परीक्षा देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर 2 जून, 2018 को सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे के बीच आयोजित की जायेगी.
 
परीक्षा का प्रारूप 
 
यूजी प्रोग्राम (बीबीए (लॉजिस्टिक्सस, रिटेलिंग व इ-कॉमर्स को छोड़कर)) : इस परीक्षा में 200 वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे. परीक्षा में 12वीं स्तर के इंगलिश, जनरल एप्टीट्यूड, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स से प्रश्न होंगे.
 
 पीजी प्रोग्राम (एमबीए (पोर्ट व शिपिंग मैनेजमेंट), एमबीए (इंटरनेशनल ट्रांसपोर्टेशन व लॉजिस्टिक्स) और एमएससी (कॉमर्शियल शिपिंग व लॉजिस्टिक्स) प्रोग्राम के लिए) : इसमें 120 वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे, जिसमें क्वांटिटेटिव एबिलिटी, डेटा इंटरप्रिटेशन, वर्बल एबिलिटी व लॉजिकल रीजनिंग से प्रश्न पूछे जायेंगे.
 
पीजी प्रोग्राम (एमटेक (मरीन इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट), एमटेक (नवल आर्किटेक्चर व ओशन इंजीनियरिंग) और एमटेक (ड्रेजिंग व हार्बर इंजीनियरिंग) में प्रवेश के लिए) : परीक्षा में कुल 120 प्रश्न इंगलिश, मैथ्स और मेकेनिकल इंजीनियरिंग/ नवल आर्किटेक्चर/ मरीन इंजीनियरिंग/ सिविल इंजीनियरिंग से पूछे जायेंगे.
 
इंजीनियरिंग और मेडिकल से इतर कैरियर तलाश रहे युवाओं के लिए मरीन और शिपिंग इंडस्ट्री एक उम्दा विकल्प है. देश की तरक्की में अहम योगदान देनेवाले इस सेक्टर में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और साइंस की पृष्ठभूमि के छात्रों का अपार संभावनाएं इंतजार कर रही हैं. प्रतिष्ठित भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय ने हाल में विभिन्न यूजी और पीजी कोर्सेज में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है. कोर्सेज और प्रवेश परीक्षा आदि जानकारी के लिए यहां पढ़ें विस्तार से...