Sunday, November 19, 2017
बोर्ड / यूनिवर्सिटीज़

कम अंक आने पर भी टॉप संस्थानों में एडमिशन

कम अंक आने पर भी टॉप संस्थानों में एडमिशन
इंटरमीडिएट और मैट्रिक के परीक्षा परिणाम आने के बाद सबसे बड़ा तनाव आगे की पढ़ाई का होता है. ग्रेजुएशन में किस विश्वविद्यालय में एडमिशन होगा या इंटर किस संस्थान से करें. यह तनाव सिर्फ छात्रों को ही नहीं होता, बल्कि उनके माता-पिता या फिर अभिभावक को भी होता है.
 
मैट्रिक और इंटर किसी भी छात्र के कैरियर के लिए फाउंडेशन होता है और अच्छे संस्थान का चुनाव करना अहम होता है. जिन छात्रों को अच्छे अंक आते हैं, उनका एडमिशन पटना, रांची या दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में हो जाता है, लेकिन कम अंक प्राप्त करनेवाले छात्र इस दुविधा में रहते हैं कि उनका एडमिशन मनमाफिक संस्थानों में नहीं हो पायेगा. असल में यह वास्तविकता नहीं है. यदि किसी छात्र को इंटर या मैट्रिक की बोर्ड परीक्षा में कम अंक मिले हैं और उनमें टैलेंट है, तो देश के दूसरे नामचीन संस्थानों में प्रवेश मिल सकता है, बशर्ते उनमें मेधा हो, पढ़ाई के प्रति लगन हो और वे मेहनत करना जानते हों. अध्ययन करना अलग बात है और अच्छे अंक लाना और बात है. अच्छे अंक लाना एक कला है और जरूरी नहीं कि हर इंसान उसमें पारंगत हो.
 
टेस्ट देकर पाएं एडमिशन
पहले इंटर के छात्रों की बात करें, जो ग्रेजुएशन में एडमिशन लेना चाहते हैं और उनके अंक मनोनुकूल नहीं आ सके. यदि उनमें योग्यता है और मेहनत करना जानते हैं, तो वे एंट्रेंस टेस्ट देकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं. यदि आपकी इच्छा डॉक्टर या इंजीनियर बनने की है, तो आपको नीट या जेइइ की परीक्षा पास करनी होगी और सफलता प्राप्त करने के रास्ते में बोर्ड परीक्षा में आये अंक अधिक मायने नहीं रखते. यदि आप जिंदगी में डॉक्टर या इंजीनियर के इतर अपना भविष्य देख रहे हैं और अच्छे संस्थान से डिग्री प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, तो दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय सहित तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश पा सकते हैं. इन संस्थानों में प्रवेश के लिए आपके बोर्ड के अंक नहीं, बल्कि संस्थानों द्वारा आयोजित एंट्रेंस टेस्ट के स्कोर मायने रखते हैं.
 
दो वर्ष हैं काफी महत्वपूर्ण
मैट्रिक में जिन छात्रों को कम अंक आये हैं, उनके लिए आगामी दो वर्ष काफी महत्वपूर्ण हैं. यदि वे अभी सचेत हो जायें और कड़ी मेहनत करें, तो जिंदगी में सफलता प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता. इस बार जिस तरह से बिहार बोर्ड के रिजल्ट आये हैं, वे काफी चिंताजनक हैं. जाहिर है यदि किसी कारणवश आपमें मेधा होते हुए भी कम अंक आये हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. जिस स्कूल या संस्थान में इंटर में प्रवेश मिलता है, ले लें और पढ़ाई ऐसे करें कि इंटर की बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक आयें. हां, यहां इस बात पर गौर करना आवश्यक है कि आप इंटर में साइंस, आर्ट्स या कॉमर्स क्या ले रहे हैं और इन ब्रांचों में अपना भविष्य कहां देख रहे हैं. इंटर की पढ़ाई के दौरान सेल्फ स्टडी आवश्यक है, क्योंकि इससे सिलेबस पर पकड़ मजबूत होगी.
 
उम्मीद के साथ करें पढ़ाई
कहा जाता है कि असफलता सफलता की पहली सीढ़ी है. जिन छात्रों को मैट्रिक या इंटर में कम अंक आये हैं, उन्हें इस बात से संतोष करना चाहिए कि उन्हें जीवन के शुरुआती दौर में ही एक बड़ा सबक सीखने को मिला. यदि इस सबक को जिंदगी भर याद रखेंगे, तो असफलता कभी पास नहीं आयेगी. किसी भी काम को हलके में नहीं लेनी चाहिए. हर काम में अपनी ओर से सौ फीसदी परफॉर्मेंस करनी चाहिए. यदि छात्र गंभीरता से अध्ययन कर रहे होते, तो शायद यह दिन न देखना पड़ता. कई बार ऐसा भी होता है कि परीक्षा अच्छी जाने के बाद भी किसी कारणवश मनमाफिक अंक नहीं आ पाये. ऐसे में चिंता नहीं, चिंतन करें. कई लोग अक्सर कहते हैं कि परीक्षा तो अच्छी ही जाती है, रिजल्ट अच्छा हो, तब बात बने. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ऐसे लोगों को अपने अध्ययन का स्तर पता होता है और वे अपना ‘रिजल्ट’ जानते हैं. जो छात्र कड़ी मेहनत करेंगे, विषय पर पकड़ मजबूत होगी, कांसेप्ट क्लियर होगा, उनके लिए परीक्षा कोई चुनौती नहीं होती, बल्कि एक हर्डल होता है, जिसे बस पार करना है.
 

कैरियर सलाह
विनीत उत्पल