Tuesday, April 25, 2017
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रोमांच से भरा कैरियर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट

रोमांच से भरा कैरियर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट
ब्रह्मानंद मिश्र
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के साथ-साथ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट संभालने वाले प्रोफेशनल्स की बड़ी टीम होती है. खेलों की भव्यता और उत्कृष्टता में ट्रेंड प्रोफेशनल्स का बड़ा योगदान होता है. यदि आप भी जुनून और रोमांच भरे से इस प्रोफेशन में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो कैसे करनी होगी पढ़ाई और कहां-कहां मिलेंगे मौके, जानने के लिए पढ़ें विस्तार से...
 
स्पोर्ट्स यानी खेल वैश्विक स्तर पर रोजगार और रेवन्यू दोनों मामलों में एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुका है. हालांकि, स्पोर्ट्स बिजनेस का विभिन्न देशों में अलग-अलग मायने होता है. वैसे तो हमारे देश में पारंपरिक खेलों का प्रसार देश के हर कोने में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर हम अभी तक अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाये हैं. क्रिकेट, बैडमिंटन, कुश्ती, टेनिस, हॉकी, कबड्डी जैसे कुछ खेलों के बड़े टूर्नामेंटों में देश ने कुछ बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं. लेकिन अभी बहुत कुछ करना है, लिहाजा इस क्षेत्र में संभावनाएं काफी हैं. स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार भारत के कुल रोजगार में स्पोर्ट्स की हिस्सेदारी मात्र .05 फीसदी है. यह आंकड़ा भले ही बहुत छोटा नजर आ रहा है, लेकिन संभावनाएं बिल्कुल छोटी नहीं है. एक अनुमान के मुताबिक 2025 तक 25 लाख लोग इंडियन स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का हिस्सा होंगे.
 
फिक्की 2014 की एक रिपोर्ट बताती है कि प्रत्येक 1100 खिलाड़ियों के लिए भारत में 55 कोच, 15 ट्रैक व फील्ड एक्सपर्ट, 25 स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट, 50 ट्रेनर, 22 स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन एक्सपर्ट, 11 स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, 106 स्ट्रेंथ ट्रेनर के साथ कंपीटिशन मैनेजर, बायोमेकेनिकल इंजीनियर, स्पोर्ट्स फोटोग्राफर, स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्रोफेशनल, स्पोर्ट्स लॉ एक्सपर्ट और इवेंट मैनेजर की जरूरत होती है.
 
हाल के वर्षों में शुरू हुए इंडियन प्रीमियर लीग (क्रिकेट), हॉकी इंडिया लीग, इंडियन बैडमिंटन लीग, प्रो-कबड्डी, इंडियन सुपर लीग (फुटबॉल) के साथ-साथ कुछ बड़े खेलों के व्यवसायीकरण ने प्रोफेशनल्स के लिए दरवाजे खोले हैं.
 
स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में कैरियर राहें
 
खेल के मैदान में भले ही गिनती के खिलाड़ी जूझते नजर आते हैं, लेकिन इनके पीछे और खेलों के सफल आयोजन के लिए प्रोफेशनल लोगों की एक बड़ी टीम होती है. खेलों में एथलीट, कोच, ट्रेनर, टीम मैनेजर, स्पोर्ट एजेंट, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, को-ऑर्डिनेटर, मार्केटिंग कंसल्टेंट, प्रोफेशनल स्पोर्ट प्रमोटर, इवेंट मैनेजर, स्पोर्ट इवेंट प्लानर, स्पोर्ट स्पॉन्सर स्पेशलिस्ट, स्पोर्ट प्रोडक्ट सेल्स और प्रोग्राम फैसिलिटी मैनेजर के रूप में कैरियर बनाया जा सकता है.
 
कैसे शुरू करें कैरियर
 
स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में कैरियर बनाने के लिए जरूरी नहीं है कि आप खुद खिलाड़ी हों. स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में डिग्री या डिप्लोमा हासिल करनेवाले लोग आसानी से इस इंडस्ट्री में अच्छे पैकेज पर दाखिल हो सकते हैं. स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के तहत फाइनेंस व बिजनेस मैनेजमेंट के अलावा लॉ, अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों से आनेवालों के लिए भी भरपूर मौके हैं. कई संस्थानों में स्नातक कर चुके छात्रों के लिए पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में कोर्स संचालित किये जाते हैं. 
 
इसके अलावा किसी खेल विशेष में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) या स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से फिजिकल एजुकेशन में कोर्स किया जा सकता है.
 
नजरिया होना जरूरी
 
किसी खेल में सफलता जुनून और अनुशासन पर मिलती है. इस क्षेत्र में आने के लिए सबसे पहले आपके अंदर खेल भावना का होना जरूरी है. वैसे तो स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में स्पोर्ट मार्केटिंग, एथिक्स, फैसिलिटी प्लानिंग व मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट थ्योरी, स्पोर्ट मार्केटिंग, प्रमोशन, पब्लिक रिलेशन और रिस्क मैनेजमेंट आदि की पढ़ाई करनी होती है. लेकिन इन सबसे इतर जरूरी है कि आपके पास फिजिकल एजुकेशन का आधारभूत ज्ञान हो.
 
काम आयेगी अकादमिक पढ़ाई
 
देश के कई विश्वविद्यालयों में बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) और मास्टर इन फिजिकल एजुकेशन सहित विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा स्तर के कोर्स संचालित किये जाते हैं. इन कोर्सेज में स्पोर्ट्स एक्टिविटी के अलावा बिजनेस स्किल और एडमिनिस्ट्रेशन पर विशेष रूप से फोकस किया जाता है.
 
कहां मिलेगी जॉब
 
खेलों के विकास और इंडस्ट्री के रूप में बढ़ावा देने के लिए 52 मान्यता प्राप्त नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन हैं. जाहिर तौर पर इसमें काफी संख्या में स्पोर्ट्स मैनेजर की जरूरत होगी. भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धौनी सहित कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो एडवर्टाइजिंग/एंडोर्समेंट से करोड़ों रुपये कमाते हैं. इससे स्पष्ट हैं कि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में ब्रांडिंग और मार्केंटिंग की संभावनाओं की कमी नहीं है. स्पोर्ट्स गुड्स का देश में बड़ा कारोबार है. एडीडास, रिबॉक जैसे कई ऐसे नेशनल और इंटरनेशनल ब्रांड हैं, जो स्पोर्ट्स वीयर कारोबार में दुनियाभर में अपनी धाक जमा चुके हैं. इस क्षेत्र के अलावा स्पोर्टिंग इवेंट मैनेजमेंट में प्रोफेशनल के लिए ढेरों मौके हैं.