Sunday, November 19, 2017
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शौक के साथ उम्दा कैरियर फिजिकल एजुकेशन

शौक के साथ उम्दा कैरियर फिजिकल एजुकेशन
अनिल सेठी 
मोटिवेटर एंड काउंसेलर 
- मैं शारीरिक शिक्षक के तौर पर कैरियर बनाना चाहता हूं. इसके लिए क्या करना होगा? 
- अभिषेक कुमार
 
आज के दौर में लोगों का स्पोर्ट्स की तरफ रुझान बढ़ रहा है. स्कूल और कॉलेज में फिजिकल एजुकेशन टीचर की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है. शौक से बढ़ कर खेल अब कैरियर का रूप ले चुका है, इसलिए छात्रों के लिए फिजिकल एक्टिविटी और खेल आवश्यक हो गये हैं. इसमें शारीरिक शिक्षक की भूमिका एक मोटिवेटर, गाइड, कोच के साथ-साथ जिम्मेवार अभिभावक की होती है. आप अगर स्पोर्ट्स में अच्छे हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन कैरियर है. आप बीपीएड (बैचलर अॉफ फिजिकल एजुकेशन) कर सकते हैं. 
 
इसके अलावा बहुत से अन्य कोर्स करके भी आप फिजिकल एजुकेशन टीचर बन सकते हैं. कुछ अन्य कोर्स हैं- सर्टिफिकेट कोर्स अॉन फिजिकल एजुकेशन, डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन. इसके अलावा पोस्ट ग्रेजुएशन, जोकि बीपीएड के बाद कर सकते हैं, मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (एमपीएड). इस कोर्स के बाद आप खेल अकादमी, स्वास्थ्य क्लब, खेल के सामान की विनिर्माण कंपनियों और स्पोर्ट्स मार्केटिंग में कैरियर शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा कमेंटेटर, खेल पत्रकार, खेल प्रशिक्षक बनने के भी विकल्प हैं. 
 
फिजिकल एजुकेशन के टॉप के कॉलेज/ विश्वविद्यालय निम्नलिखित हैं- कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, पुणे. लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, तिरुवनंतपुरम. इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस, नयी दिल्ली. बॉम्बे फिजिकल कल्चर एसोसिएशन कॉलेज आॅफ फिजिकल एजुकेशन, मुंबई.
 
- मैं 12वीं की छात्र हूं और मेरी जन्म तिथि 29 जनवरी, 2001 है. मैं एआइपीएमटी या अन्य मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के पात्रता मानदंड के बारे में जानना चाहती हूं. क्या मैं इस वर्ष इसके लिए आवेदन कर सकती हूं? 
 
- रूही मिश्रा
 
एआइपीएमटी के लिए उम्मीदवार की आयु कम-से-कम 17 वर्ष होना चाहिए. ऊपरी आयु सीमा सामान्य वर्ग के लिए 25 वर्ष एवं अन्य पिछड़ा वर्ग/ अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति वर्ग उम्मीदवारों के लिए 30 वर्ष है.
 
- मैं 2014 में 12वीं पास करने के बाद तीन बार मेडिकल की प्रवेश परीक्षा दे चुका हूं, लेकिन सफलता नहीं मिली. 2014 में ही मैंने बीएससी जूलॉजी ऑनर्स में प्रवेश लिया, लेकिन द्वितीय वर्ष में पास नहीं हो सका. अब मैं ग्रेजुएशन पूरा करूं या मुझे एक बार फिर मेडिकल का एंट्रेंस देना चाहिए? - सतीश कुमार
 
आपकी परिस्थिति देख कर लगता है कि या तो आपको अपने पर ही विश्वास नहीं है या आप पूरी लगन से मेहनत नहीं कर रहे हैं. प्रवेश परीक्षा कठिन जरूर है, लेकिन असंभव बिल्कुल नहीं है. 
 
आपका पूरा ध्यान पढ़ाई पर होना चाहिए. नोट्स बना कर पिछले वर्षों के पेपर तय समय सीमा में हल करें. अगर जरूरत हो, तो तैयारी में शिक्षक या दोस्तों से मदद लें और ग्रेजुएशन एवं मेडिकल का एंट्रेंस साथ-साथ पास करें. अगर किसी कारण ऐसा न हो पाये, तो ग्रेजुएशन के बाद पैरामेडिकल कोर्स करके भी आप हेल्थकेयर इंडस्ट्री का हिस्सा बन सकते हैं.
 
-  मैं एंथ्रोपोलॉजी से बीए कर रहा हूं, जो 2017 में पूरा होगा. मैं इस क्षेत्र में कैरियर के बेहतर विकल्पों के बारे में जानना चाहता हूं. कृपया मेरा मार्ग दर्शन करें. 
 
- प्रशांत कुमार
 
एंथ्रोपोलॉजी में अच्छा कैरियर बनाने के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन को शुरुआती प्वाइंट माना जाता है. लेकिन ग्रेजुएशन के बाद भी कैरियर की शुरुआत ट्रेनी के तौर पर कर सकते हैं. कैरियर के लिहाज से इसके तीन प्रमुख क्षेत्र हैं- टीचिंग, रिसर्च एवं म्यूजियम. रिसर्च जॉब के लिए ऑर्गनाइजेशन हैं- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, यूनाइटेड नेशन का यूनेस्को एवं यूनिसेफ. 
 
इसके अलावा एनजीओ, टीचिंग, लॉ, मेडिसिन, सोशल वर्क और जर्नलिज्म आदि में भी विकल्प उपलब्ध हैं. कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट भी बन सकते हैं. म्यूजियम, आइसीएमआर, डब्ल्यूएचओ भी रोजागार के लिए अच्छे विकल्प हैं . 
 
पुलिस विभाग भी एंथ्रोपाेलाॅजिस्ट काे अपराध का पता लगाने के काम के लिए रिक्रूट किया जाता है. इन सबके अलावा एंथ्रोपोलॉजी उन्मुख अनुसंधान, जोकि सामाजिक समस्या और सामाजिक मुद्दों, जैसे जन स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी नियोजन, 
सामाजिक कल्याण एवं गवर्नमेंट प्लानिंग, अंतरराष्ट्रीय विकास के क्षेत्र में किया जाता है, वह समाज के बहुत काम आता है.